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दो जोड़ी झूमके–एक कहानी

आज फिर वही घर के कामों से थकी-हारी चंद पलो के आराम के लिए ड्रेसिंग टेबल के आगे बैठी… बालों को एक तरफ करके हल्के-हल्के हाथों से सहारते हुए अचानक ध्यान सूने पड़े कानों पर चला गया। कानों को छूआ ख्याल आया कि बालिंया तो कल ही उतार के रख दी थी… खैर छोड़ो घर में ही तो रहना है और ऊपर से यह गर्मी का मौसम उफ…

फिर से बाल सवारते हुए अचानक नजर उस डॉर पर पर पड़ी… डॉर का दरवाजा खोला तो वही मां की बचपन में बनाई हुई छोटी सी लाल-पीली रंग की पोटली जिसमें एक डोर बंधी थी उस पर नजर पड़ी और फिर से वही पुरानी यादें ताजा हो गई…

हां वही आठवीं कक्षा का आखरी दिन जब भोली सी शकल का दिखने वाला वह भौदू सा लड़का… हां वही लड़का जिसको कुछ महीने पहले ही दिल दे बैठी थी… पास आता है और बैठ कर कहता है आज तो यहां हमारे स्कूल का आखिरी दिन है अब तो हम कभी नहीं मिल पाएंगे, मैं पापा के पास इलाहाबाद चला जाऊंगा और तुम यहां मेरठ में….. अब जब दूर होना ही है तो मैं तुम्हारे लिए कुछ लाया हूं यह लोग बड़ी मुश्किल से पैसे बचाकर घरवालों से छुपाकर तुम्हारे लिए यह लाल छोटी मोतियों के “झुमके” लाया हूं यह देखो ना इस में नग भी लगा है… मगर ये क्या मैं इसका पेंच तो लाना भूल ही गया… अब तुम इन्हें कैसे पहनोगी ऐसा कहते हुए अभी उसने ऐसा उदास सा चेहरा बनाया ही था कि क्लास में बच्चे आ गए… एक नंबर का भौदू था वो..भला कोई करता है ऎसे कि झूमके लाए और नग भूल जाए… फिर मैं भी कम कहां थी… ले आई वो झुमके… मां से छुपाकर कभी-कभी कानों से लगा लेती थी… थोड़ी उदास भी होती थी की भौदू चला गया.. पर पिछली बात पर उसकी वह शक्ल याद करके हंसी भी आ जाती थी… वह दिन अब भी याद है जब मां की दी हुई इस लाल पीली पोटली में मां और बड़ी बहन से छुपा कर झुमके को रख दिया था…

आज जब भी ये पोटली को देखती हूं वह मंजर याद आता है… आज घर में अकेली हूं क्यों ना इन झूमको को फिर से पहना जाए…लेकिन सोचती हूं क्या यह सही रहेगा क्योंकि अब तो मैं शादीशुदा हूं और कल ही मेरी शादी के तीन  साल पूरे हो जाएंगे… फिर पति भी तो इतना प्यारा मिला है… मेरी हर छोटी बड़ी जरूरत का ख्याल रखता है, इन तीन  सालों में उसने कोई कमी थोड़ी ना छोड़ी है.. नहीं- नहीं यह तो सरासर बेईमानी होगी… अब मैं इन झूमको को कभी हाथ भी नहीं लगाऊंगी… रुको डॉर बंद ही कर देती हूं…यही सही रहेगा… तभी डोर बेल बजती है.. लगता है पति देव आ गए…सोचती हूं क्यों ना आज उन्हें बता ही दूं… लेकिन नाराज हो गए तो… छोड़ो देखा जाएगा फिर कभी सही… घंटी की आवाज तेज होने लगी… हां बाबा रुको आ गई बस।

आज जनाब इतनी जल्दी कैसे आ गए… अरे भूल गई क्या कल हमारे शादी की तीसरी सालगिरह है और इस को खास बनाने के लिए कुछ तैयारी तो बनती है ना बॉस.. हां हां वह सब तो ठीक है मगर इस बार का मेरा गिफ्ट कहां है इस बार में सस्ते वाली साड़ी में नहीं मानने वाली इस बार तो कुछ खास होना चाहिए…

अरे हां बाबा इस बार तो कुछ ज्यादा ही खास है तुम्हारे लिए… ठीक है मगर मेरी एक शर्त है इस बार का सालगिरह बस हम दोनों ही मनाएंगे वह भी घर पर… अच्छा जी चलो ठीक है.. बस क्या था अगले दिन बेसब्री से शाम का इंतजार था और आखिरकार शाम आई है… अरे बाबा जल्दी आओ कब से रेडी है केक…केक काटने के बाद एक दूसरे के चेहरे पर भूतों की तरह केक लगाने के बाद… ठीक है अब बहुत हो गया प्यार मोहब्बत अब यह बताओ मेरा गिफ्ट कहां है…हां वो तो में भूल ही गया था.. यह कहते हुए पति ने जेब से एक लाल कलर का डिब्बा खोलते हुए  दो सुंदर सोने के बड़े-बड़े  झूमके निकालें…

वाह झुमके…. यह हुई ना बात… तुम कितने अच्छे हो… तुम मेरे लिए इतने प्यारे झुमके लेकर आए… अब लाए हो तो अपने हाथों से ही पहना दो ना… हां हां क्यों नहीं… मगर एक गड़बड़ हो गई… क्यों क्या हो गया… मैं झुमके का पेंच लाना तो भूल ही गया… मैं हर बार ऐसा ही करता हूं… हर बार चीजें भूल जाता हूं… सच में हद हो गई तुम भी भौदू ही निकले… भौदू… तुमने ऐसे ही कहा था या फिर… वह छोड़ो तुमने कहा कि हर बार भूल जाते हो मेरे से पहले कितने लोगों  को झूमके दे चुके हो…

अरे वो मैं… क्या मैं मैं लगा रखा है… साफ-साफ बताओ… अरे वह मैंने बचपन में एक लड़की को दिया था…वहां भी पेंच ले जाना भूल गया था..दो  मिनट रुको… अरे सुनो तो तुम नाराज मत हो वह बचपन की बात की भई… क्या वह यह झूमके हैं …हैं तुम्हारे पास कैसे… क्या तुम वही हो… हां भौदूराम.. मगर तुमने अब तक संभाल कर रखा है… मैं आज तुम्हें बताने वाली थी मगर तुम गलत ना समझो इसले नही बताया..दरअलस डरता तो मैं भी था.. मैंने भी उसी दिन दुकान पर जाकर पेंच ले लिया था..

जिसे आज तक डायरी के छोटे खबर में छुपा रखा है… है तो लाओ ना.. आज तुम्हारे इस सोने के झूमकों से ज्यादा कीमती मेरे यह पोटली में रखे बिना पेंच के अधूरे झुमके हैं.. हां जी तो यह लो.. अरे क्या लो तुम अपने हाथों से पहना दो ना… मगर यह कुछ छोटे नहीं हो गए हैं.. नहीं नहीं मैं छोटे ही पहन लूंगी.. आज सही मायने में मेरे यह झूमके दो जोड़ी झूमके बने हैं….

 

लेखक : अविरल राम त्रिपाठी

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7 comments

  1. Interesting story

  2. nice !!

  3. nicely written.

  4. good one

  5. nice story.

  6. the nice story must have an English version too.

  7. nice story I have to convert that into English that was so interesting.

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